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June 5, 2026
स्वास्थ्य

नॉनवेज को प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम का सबसे बेहतर स्रोत माना जाता है

नॉनवेज को प्रोटीन, आयरन और कैल्सियम का सबसे बेहतर स्रोत माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि जो लोग नियमित तौर पर नॉनवेज यानी मटन, चिकन, मछली और अंडे का सेवन करते हैं उनमें हीमोग्लोबिन की कमी नहीं हो सकती. नॉनवेज खाने वालों में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर डॉक्टर भी आश्चर्य जताते हैं. दुनिया के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग तरीके से नॉनवेज खाने का कल्चर है. मटन, चिकन और अंडा पूरे देश में लोग बेहद चाव से खाते हैं. वहीं मछली खाने का कल्चर इलाकों के हिसाब से अलग-अलग है. समंदर से लगे इलाकों जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिणी राज्यों में मछली खूब पसंद की जाती है.

लेकिन, आज हम इन सभी प्रमुख नॉनवेज से अलग एक खास नॉनवेज की बात कर रहे हैं. यह मात्र 80 से 100 रुपये किलो के भाव से मिलता है. लेकिन, इमसें प्रोटीन, कैल्सियम, हीमोग्लोबिन और अन्य विटामिन इतनी प्रचुर मात्रा में मिलती है कि एक 70 साल का बुजुर्ग कुछ दिनों तक इसका सेवन कर ले तो वह एक जवान युवा की तरह महसूस कर सकता है. दरअसल, हम बात कर रहे हैं स्नेल यानी घोंघा की. यह एक खास प्रजाति का जीव है. यह असम और पश्चिम बंगाल सहित नमी और पानी वाले इलाकों में ज्यादा पाया जाता है. यह एक जलीय जीव है. ये मुख्य रूप से सर्दियों में धान के खेत में पाया जाता है. असम में इसे शमुक कहा जाता है. यह 80 से 100 रुपये किलो के भाव से बिकता है. असम के आदिवासी समाज के लोग इसे खूब पसंद करते हैं. राभा, कार्बी और बोडो समुदाय के लोग भी इसे खूब पसंद करते हैं.

वेबसाइट वेबएमडी की एक रिपोर्ट के मुताबिक घोंघे आयरन, कैल्सियम, विटामिन ए और अन्य कई मिनरल के लिए बेहतरीन नॉनवेज है. आयरन से हमारी बॉडी में खून यानी हीमोग्लोबिन की कमी पूरी होती है. कैल्सियम से हमारी हड्डियां मजबूत बनती हैं, वहीं विटामिन ए हमारा एम्यून सिस्टम मजबूत करता है. कुल मिलाकर घोंघा यानी स्नेल का सेवन करने वाले 70 साल की उम्र में खुद फिट और जवान महसूस कर सकते हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक 100 ग्राम घोंघे के मांस में 16.5 ग्राम प्रोटीन और केवल दो ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है. इसके साथ इसमें प्रचूर मात्रा में गुड कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है. इसमें 3.5 मिलीग्राम आयरन, 382 मिलीग्राम पोटैशियम, 250 मिली ग्राम मैग्नीशियम पाया जाता है. इस मामले यह मटन, चिकेन, पोर्क, बीफ और यहां तक कि मछली से भी बेहतर है.

जैसा कि हम ऊपर ही बता चुके हैं यह प्रोटीन से भरपूर और बेहद कम फैट वाला नॉन वेज है. ऐसे में वेट लूज करने की चाहत रखने के वाले लोग अगर इसका नियमित सेवन करें तो यह बहुत फायदेमंद होता है. आप इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि 100 ग्राम घोंघे के सेवन से आपको 90 कैलोरी की ऊर्जा मिलती है.

असम में काली मसूर दाल के साथ घोंघे को पकाने का रिवाज पुराना है. इसके लिए सबसे पहले काली मसूर की दाल को ठीक से साफ कर लें. इसके बाद घोंघे को भी साफ कर उसे उबाल लें. काली मसूर में थोड़ा नमक डालकर उसे पकाएं. कुछ देर बाद दाल से छाग निकलने लगेगी. छाग को अलग कर दें. फिर दाल को पूरी तरह पकाकर उसे अलग कर लीजिए. अब एक फ्राइंग पैन में सरसों तेल और प्याज, धनिया, कड़ी पत्ते, मिर्च पाउडर आदि से घोंघे और दाल को मिलाकर फ्राइ कर लीजिए. इसके बाद थोड़ा हरा धनिया मिलाकर आप बेहतरीन दाल-घोंघे का आनंद ले सकते हैं.

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