सीने में दर्द एक गंभीर समस्या है। इसे अक्सर हार्ट अटैक से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हार्ट स्पेशलिस्ट के अनुसार, बिना सर्दी के बार-बार ऐसा होना फेफड़ों में क्लॉट का संकेत भी हो सकता है।
सीने में दर्द हार्ट अटैक का सबसे बड़ा संकेत है। लेकिन सीने में दर्द हार्ट अटैक ही हो, ये जरूरी नहीं। कई बार कुछ अन्य वजहों से भी सीने में दर्द की समस्या हो सकती है। इसकी एक मुख्य वजह लंग क्लॉट भी है। जिसे पल्मोनेरी एम्बोलिज्म कहा जाता है। यह एक ब्लड क्लॉट है, जो फेफड़ों में आर्टरी में ब्लड फ्लो को रोक देता है। ज्यादातर मामलों में ब्लड क्लॉट पैरों की नसों से शुरू होकर फेफड़ों तक जाता है। यह स्थिति जीवन के लिए खतरा है।
गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल के वैस्कुलर सर्जरी के चेयरमेन डॉ.राजीव पारेख ने इंस्टाग्राम पर बताया कि छाती में दर्द सिर्फ लंग इंफेक्शन, ठंड लगने या दिल का दौरा पड़ने की वजह से ही नहीं होता। कभी-कभी फेफड़ों में क्लॉटिंग कारण भी यह स्थिति बन सकती है। अगर किसी को बार-बार छाती में दर्द हो रहा है, सांस लेने में तकलीफ है, चलने-फिरने या बोलने में दिक्कत महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से सपंर्क करना चाहिए।
सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, बेहोश हो जाना, हार्ट बीट का अनियमित रूप से धड़कना, बहुत ज्यादा पसीना आना, बुखार और पैरों में सूजन इसके प्रमुख लक्षण हैं।
समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर ब्लड फ्लो में कमी का कारण बन सकती है जिससे लंग टिश्यू को नुकसान होता है। इससे ब्लड में ऑक्सीजन लेवल कम हो सकता है, जो शरीर के अंगों को भी नुकसान पहुंचाता है। डॉ. पारेख के अनुसार, वक्त रहते समस्या का निदान किया जाए, तो नसों के अंदर बनने वाले क्लॉट को डिजॉल्व करने के लिए ट्रीटमेंट दिया जा सकता है। वरना आगे चलकर यह बहुत गंभीर रूप ले सकती है।
ज्यादातर मामलों में, उम्मीद यही की जाती है कि आपका शरीर क्लॉट को अपने आप ही घोल देगा। फिर भी ऐसा नहीं हुआ तो अस्पताल में भर्ती होने पर एक इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है।
इस कंडीशन के बनने पर आपको ऐसा महसूस होगा जैसे दिल का दौरा पड़ रहा हो। इसमें दर्द अक्सर तेज होता है और जब आप गहरी सांस लेते हैं तो यह ज्यादा महसूस होता है। दर्द आपको गहरी सांस लेने से रोक सकता है। खांसते या झुकते समय भी आपको इस दर्द का अनुभव हो सकता है।
जिन लोगों को अक्सर सीने में दर्द होता है, उन्हें संतुलित आहार लेना चाहिए। फिजिकली फिट और एक्टिव रहें। स्मोकिंग से बचें। यात्रा करते समय पैरों को रिलेक्स देने के लिए थोड़ा सा ब्रेक लें। हाइड्रेटेड रहें। कंप्रेशन स्टॉकिंग पहनें। पैरों को क्रॉस करके ना बैठें। टाइट फिटिंग वाले कपड़े पहनने से बचें। ओवरवेट हैं, तो वजन कम करें।
