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June 5, 2026
राज्य

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर बिलकिस बानो

 गुजरात : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिलकिस बानो के साथ गैंग रेप और उनके परिजनों की हत्या के 11 दोषियों की सज़ा में छूट देकर रिहा करने के फ़ैसले को रद्द कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट का जब यह फ़ैसला आया तो देवगढ़ बैरिया के कपाड़ी इलाक़े का मकान नंबर 45 और 46 वीरान नज़र आया.गुजरात सरकार ने 15 अगस्त 2022 को इन दोषियों को रिहा कर दिया था.

अदालत ने कहा कि गुजरात सरकार के पास सज़ा में छूट देने का अधिकार नहीं है. अदालत ने सभी दोषियों को दो हफ़्ते में जेल में हाज़िर होने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से आई ख़ुशी उनके चेहरे पर साफ़ झलक रही थी. जैसे ही कोई व्यक्ति इस इलाक़े में प्रवेश करता, उसके लिए समूहों में जमा हुए लोगों, उनमें बाँटी जा रही चाय और इलाक़े की चकाचौंध के बीच ख़ुश चेहरों से नज़रें बचा पाना मुश्किल थाउनके पड़ोसियों ने बताया कि दो हफ़्ते पहले तक बानो, उनके पति याक़ूब पटेल और उनके बच्चे भी यहीं रहते थे लेकिन मीडिया से बचने के लिए वे किसी अज्ञात स्थान पर चले गए हैं.

बिलकिस के घर के पास कपाड़ी इलाक़े में ख़ुशी का माहौल था. युवा पटाखे फोड़ते नज़र आए तो महिलाएं छोटे-छोटे समूहों में इस मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर चर्चा करती नज़र आईं.

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बिलकिस बानो के रिश्तेदार और इस मामले के प्रमुख गवाह रज्जाक मंसूरी ने बीबीसी से कहा कि उन्हें यह जानकर ख़ुशी हुई कि न्याय के लिए संघर्ष ने उन्हें परिणाम दिया है.

उन्होंने कहा, “इस मामले के 11 दोषियों को सज़ा में छूट देने के गुजरात सरकार के आदेश के बाद हम टूट गए थे, लेकिन आज न्यायपालिका में हमारा विश्वास और विश्वास मज़बूत हुआ है.”

साल 2002 से पहले बिलकिस बानो अपने परिवार के साथ जिस मुस्लिम मोहल्ले में रहती थीं, वह पुलिस स्टेशन से कुछ मीटर की दूरी पर है. हालांकि यहाँ के कई लोग पहले ही अपने घरों को छोड़कर देवगढ़ बैरिया में रह रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनाए अपने फ़ैसले में गुजरात सरकार के आदेश को पलटते हुए कहा कि सज़ा में छूट देने की शक्तियां गुजरात सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं बल्कि महाराष्ट्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं.

अदालत ने कहा कि चूंकि अदालत को ग़लत जानकारी प्रदान की गई थी, इसलिए मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से पारित आदेश रद्द कर दिया जाएगा, जिसमें कहा गया था कि सज़ा में छूट पर फ़ैसला गुजरात सरकार लेगी.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले से मुस्लिम समुदाय के लोग ख़ुश हैं, लेकिन वे बहुसंख्यक समुदाय की ओर से किसी नकारात्मक प्रतिक्रिया को लेकर चिंतित भी हैं.

मुस्लिम समुदाय के एक सदस्य ने कहा, “दोषियों में से अधिकांश लोग राजनीतिक रूप से शक्तिशाली हैं और शीर्ष नेताओं से जुड़े हुए हैं. इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जश्न नहीं मना रहे हैं.”

 

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