यह सौदा लंबे समय से खटाई में पड़ा हुआ था क्योंकि तुर्की ने स्वीडन को नेटो का सदस्य बनाने को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया था.
दरअसल, नेटो पश्चिमी मुल्कों का सैन्य गठबंधन है जिसमें किसी भी देश को शामिल करने के लिए सभी सदस्य देशों की अनुमति ज़रूरी होती है.
अब तुर्की ने औपचारिक तौर पर स्वीडन को नेटो की सदस्यता देने के लिए हामी भर दी, है तो अमेरिका ने भी 23 अरब डॉलर के इस सौदे को हरी झंडी दिखा दी है.

तुर्की को नए विमानों से साथ पुराने विमानों को बेहतर बनाने वाली किट भी बेचेगा अमेरिका
डेमोक्रैटिक सीनेटर बेन कार्डिन अमेरिकी सीनेट के विदेश मामलों की कमेटी के प्रमुख भी हैं. यह कमेटी उन चार प्रमुख कमेटियों में से एक है, जिनकी मंज़ूरी हथियारों के सौदों के लिए अहम होती है.
बेन कार्डिन ने कहा, “भले ही तुर्की की ओर से स्वीडन को नेटो का सदस्य बनाने की मंज़ूरी मिलने के बाद मैंने उसे एफ़-16 विमान बेचने को स्वीकृति दी है, लेकिन इसे हल्के में न लिया जाए.”
उन्होंने कहा, “तुर्की को मानवाधिकार के रिकॉर्ड को बेहतर करने और यूक्रेन पर बड़े आक्रमण के लिए रूस को ज़िम्मेदार ठहराने के लिए और क़दम उठाने की ज़रूरत है.”
अब हंगरी ही इकलौता नेटो सदस्य देश है, जिसने स्वीडन को शामिल करने को मंज़ूरी नहीं दी है. हालांकि, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि उसके रुख़ में भी बदलाव आ रहा है.
तुर्की की आबादी में कुर्द समुदाय लगभग 15-20 फीसदी हैं. लंबे समय से तुर्की की सरकारों पर इस समुदाय को प्रताड़ित करने के आरोप लगते रहे हैं.
स्वीडन में रहने वाला कुर्द समुदाय पिछले कुछ दशकों में वहां की राजनीति में जगह बनाने में सफल रहा है.
ऐसे में, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने सवाल किया था, “एक देश जिसकी सड़कों पर आतंकवादी घूमते हों, वो नेटो में योगदान कैसे दे सकता है?”
अर्दोआन ने मांग की थी कि स्वीडन इन चरमपंथियों को “राजनीतिक, आर्थिक और हथियारों से जुड़ी मदद देना बंद करे.”
इसके बाद स्वीडन ने बीते साल जून महीने में आतंकवाद से जुड़े अपने क़ानून में बदलाव लाते हुए चरमपंथी संगठनों का सदस्य बनने को ग़ैरक़ानूनी बना दिया था.
इसके कुछ हफ़्ते बाद एक कुर्द शख़्स को ‘आतंकवादी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद देने’ के मामले में जेल भेजा गया.
